करोडों खर्च के बाद भी रैफर सेंटर बना जिला अस्पताल

बुलंदशहर। बुलंदशहर की चलती बस में सिलेंडर बम का शिकार बने 75 से ज्यादा घायलों में से 11 लोग अब तक मौत के गाल में समा चुके है। आग में जले लोग तिल-तिलकर मरने को मजबूर है और अरबो रूपयों की लागत से बना बुलंदशहर का जिला अस्पताल रेफर सेंटर बनकर रह गया है। इसे मरीजों का दुर्भाग्य कहे या अफसरों की दुर्भावना।

जिला अस्पताल में 7 साल पहले बनकर खडी हुई करोडों रूपये की बर्न यूनिट में कई बरस से ताला पडा है। जाहिर है अगर इस बर्न यूनिट में जले हुए घायलों को इलाज मिला होता तो कई जिंदगियां मौत के मुॅह में जाने से बच जाती।

अरबों का जिला अस्पताल और सुविधा मामूली क्लीनिक की तरह है। करोडो से बनी बर्न यूनिट बरसों से धूल खा रही है। अफसर चुप है लेकिन तिल-तिलकर मरने को लोग मजबूर है। आग में जले 75 लोगों का इलाज समय पर नही हुआ।

5 मासूम बच्चों समेत 11 लोगों की मौत का जिम्मेदार कौन है। आखिर बुलंदशहर का स्वास्थ्य महकमा क्यों नही सुधरता। बुलंदशहर के बाबू बनारसीदास जिला अस्पताल का बर्न विभाग इतनी बडी शानदार इमारत, लेकिन बरसों से इस इमारत पर ताला पडा है।

आग में जले लोगों को बचाने के लिए सरकार ने करोडो रूपए की लागत से इस बर्न युनिट को बनवाया था। लेकिन नाकारा और निकम्मे अफसरों की वजह से धूल फांक रहे है। करोडो रूपये के उपकरण और बेबसी की आग में बुलंदशहर के मरीज मरने को मजबूर है।

सोमवार यानी 22 सितम्बर की शाम को इस बर्न यूनिट की सबसे ज्यादा जरूरत थी। लेकिन फिर भी बर्न यूनिट में पडा रहा ताला और एक-एक करके 6 दर्जन से ज्यादा लोग दिल्ली के अस्पतालों को रेफर कर दिए गये।

जिला अस्पताल में बर्न यूनिट होते हुए भी इलाज नही मिला और चार घंटे बाद दिल्ली पहुंचे 11 घायल तडफ-तडफकर मर गये। आखिर कौन है इस लापरवाही के लिए जिम्मेवार।

हालत इतने बदतर है कि मामूली रूप से जले हुए लोगों को भी अलग से कही रखने का इंतजाम नही है। कहने की जरूरत नही कि आग में जले घायलों में तेजी से इन्फैक्शन फैलता है और उनकी जिंदगी खतरे में पड जाती है।

लेकिन इस हकीकत को जानने वाले डाॅक्टर अपने कार्यकाल के वक्त का पैमाना खडा करके अपनी जिम्मेवारियों से पल्ला झाड लेते है। ऐसा नही कि बडे अफसरों को इस बदइंतजामी का पता न हो।

डीएम से लेकर कमिश्नर तक सब जानते है। लेकिन बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधे। उत्तर प्रदेश की सरकार की नजर इस घटना पर लगी हुई है और मुआवजे की घोषणा से पीछे नही है। लेकिन अस्पताल में करोडों के बर्न विभाग को चालू करने की किसी के पास कोई योजना नही।

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