बुलंदशहर में 42 हजार से ज्यादा बच्चे कुपोषण के शिकार!

बुलंदशहर के सरकारी स्कूलों में सर्वशिक्षा अभियान के तहत केन्द्र सरकार सैकडों करोड रूपये खर्च कर रही है लेकिन पानी की तरह पैसा बहाने के बाबजूद इन स्कूलों में कुपोषित बच्चों की तादात बहुत ज्यादा है।

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जिले के आंगनबाडी केन्द्रों और प्राइमरी स्कूलों में 42 हजार से ज्यादा कुपोषित बच्चे मिले हैं। इन बच्चों में जन्मजात बीमारियों के अलावा कुपोषण के चलते अक्षमता के लक्षण पाये गये हैं। कुपोषित बच्चों की इतनी बडी संख्या मिलने से जिले में मिड-डे-मील, पोषाहार वितरण और हाटकुक जैसी योजनाओं पर सवाल खडे हो गए हैं।

सर्वशिक्षा अभियान की मिड-डे-मील योजना और बालविकास विभाग का पोषाहार वितरण और हाटकुक योजना बुलंदशहर में इन योजनाओं की सार्थकता सवालों के कटघरे में खडी हो गयी है। वजह है कि सरकारी प्राइमरी स्कूलों और आंगनबाडी केन्द्रों पर हजारों की तादात में मिले कुपोषित बच्चे।

समाज के सबसे निचले पायदान पर खडे इन नौनिहालों की सेहत संवारने के लिए डेढ दशक पहले केन्द्र की अटल बिहारी वाजपेई सरकार ने मिड-डे-मील योजना की शुरूआत की थी। लेकिन शहरी इलाकों को छोड दिया जाये तो ग्रामीण इलाको में इस योजना का असर दिखाई नही देता।

अकेले बुलंदशहर में 42 हजार 633 स्कूली और आंगनबाडी केन्द्रो पर जाने वाले बच्चे बीमार चिहिन्त किए गये हैं। ये हाल तब है जब पूरे जिले में इन बच्चो को सरकार नियमित रूप से पोषाहार वितरण करा रही है। दरअसल, जिले के कुपोषित बच्चों को सामने लाने की पहल भी केन्द्र सरकार के राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम से हुई है। इस योजना के तहत इस साल के अप्रैल माह से अब तक 2 लाख 33 हजार 282 बच्चों का सरकारी स्कूल और आंगनबाडी केन्द्रों पर जाकर स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।

बीमार चिहिन्त हुए बच्चों में से 20 हजार 788 ऐसे थे जिन्हें तत्काल इलाज की जरूरत थी। लेकिन अफसोस की बात यह है कि सरकारी अस्पताल के लिए रेफर इन बच्चों में से करीब आधे यानी 10 हजार 134 बच्चे ही अस्पताल तक पहुंचे। इन बच्चों में बर्थ डिफैक्ट के अलावा विटामिन्स की कमी से होने वाली बीमारियां रतौंधी, सूखारोग, दांत-मसूडों से खून आना और शरीर की नसें कमजोर पायी गयी हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने इन बच्चों को अस्पताल तक लाने और उनके अभिभावकों को जागरूक करने की कोशिश तो की, लेकिन उन्हें पूरी तरह सफलता नही मिल पायी है।कुपोषण के शिकार ये बच्चे स्कूल और आंगनबाडी केन्द्रों पर नियमित रूप से अपनी हाजिरी लगाते हैं। जिसका मतलब उन्हें लगातार पोषाहार दिया जा रहा है।

बावजूद इसके उनमें गंभीर बीमारियों का पाया जाना इंगित करता है कि व्यवस्था में कहीं न कहीं कोई कमी जरूर है। क्या मिड-डे-मील और पोषाहार वितरण की योजनाऐं केवल कागजों तक सीमित हैं या फिर कोई है जो इन बच्चों और उन्हें मिलने वाले फायदे पर कुंडली मारे बैठा है।

सीएमओ डा. दीपक ओहरी ने बताया कि हम लोगों ने बच्चों को अस्पताल तक लाने का प्रयास किया है गाडी भी लगाई है और हमारे स्टाफ के लोग बच्चों को लाने में लगे हुए है। अब तक 10 हजार 134 बच्चे अस्पताल तक लाये गये हैं और बच्चों को लाने का प्रयास किया जा रहा है।

डीएम बी.चन्द्रकला ने बताया कि ये गम्भीर विषय है बच्चों में बीमारियां मिली है। उनके इलाज के लिए स्वास्थय विभाग द्वारा समुचित उपचार के निर्देश दिए गये हैं और हम कोशिश करेगें कि बीमार बच्चे नियमित अस्पताल तक पहुंचें। उन्होंने पूरे मामले की उच्च पदस्थ प्रशासनिक अधिकारी को जांच भी सौप दी है। कहा कि सर्व प्रथम यह पता लगाना है कि इस तरह की बीमारियां बच्चों में क्यों फैल रही है।

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