बुलंदशहर में चल रहे भ्रष्टाचार की सबसे बड़ी कहानी

08बुलंदशहर में निर्माण पूरा होने के इंतजार में खड़ा एक बिजलीघर विकास प्राधिकरण के ठेकेदार और बिजली विभाग के अफसरों के लिए सोने का अंडा देने वाली मुर्गी बन गया है।

विकास प्राधिकरण के अफसरों से मिलकर कागजों में उर्जीकृत करा लिया और बिजली अफसरों ने कागजों पर ही संविदाकर्मियों की तैनाती करके उनकी लाखों रूपये की तनख्वाह डकारकर मामले की फाइल गायब कर दी है।

विकास प्राधिकरण का यह बिजलीघर गंगानगर इलाके में बना है और जिस ठेकेदार को इसे बनाने का काम दिया गया उसके खिलाफ इसी बिजलीघर से माल चोरी करने के दो मुकदमें दर्ज किए गये है।

न बस्ती बसी…न वाशिन्दे आये और न बिजलीघर में आया करंट। लेकिन बिना करंट के बिजलीघर में बिजली विभाग का स्टाफ तैनात है और हर महीने पूरी पगार ले रहा है।

बुलंदशहर के बिजली अफसरों के भ्रष्टाचार की यह एक कडवी हकीकत उजागर हुई है, जिसका जीता-जागता सबूत है ट्रांसपोर्टनगर में अधूरा पडा यह बिजलीघर।

बिजली विभाग के अफसर बीते 24 महीनों से हर महीने एक लाख से सवा लाख रूपये केवल इस बात का डकार रहे है कि कागजों में ऊर्जीकृत हुए इस बिजलीघर में 24 संविदाकर्मी तैनात है। लेकिन हकीकत में प्राधिकरण का एक होमगार्ड इस बिजली घर में रखी करोडो रूपयों की उन मशीनों की देखभाल कर रहा है जिनमें अब तक करंट नही उतरा हैं।

दरअसल, विकास प्राधिकरण की नई आवासीय योजनाओं गंगानगर और ट्रांसपोर्टनगर को बिजली आपूर्ति देने के लिए करोडों रूपये की लागत से राजकीय निर्माण निगम से इस बिजलीघर का निर्माण कराया गया था।

काम पूरा होने से पहले ही बिजलीघर में चोरियां होने लगी और चोरी करने वाले निकले निगम के ठेकेदार के आदमी। प्राधिकरण ने ठेकेदार के खिलाफ चोरी के दो केस भी दर्ज कराये।

ठेकेदार ने आनन-फानन में बिजली अफसरों से मिलकर कागजों पर भी अधूरे बिजलीघर को ऊर्जीकृत करा लिया और बिजली विभाग के हैडओवर कर दिया।

इस घपले में प्राधिकरण के इंजीनियर भी शामिल बताये जा रहे है, जिनके खिलाफ कार्रवाई भी की गयी है।बिजली विभाग ने इस मौके का फायदा उठाकर बिजलीघर के आपरेशन के लिए यहां 6 से आठ संविदाकर्मियों की तैनाती कर दी।

यह सारा काम केवल कागजों पर हुआ और बडे अफसर इस रकम को डकारते रहे। भ्रष्टाचार के इस बडे कारनामें पर छोटे अफसर मुंह नही खोल रहे और बडो ने अभी तक बिजलीघर के दर्शन तक नही किए है।

कागजों पर ऊर्जीकृत इस बिजलीघर को ट्रांसमीटर से जोडने के लिए अभी तक करंट ही उपलब्ध नही है। फिर आखिर कैसे बिजलीघर तक करंट पहुंच गया और वहां स्टाफ तैनात कर दिया गया।

इस मामले की फाइल को गायब बताकर बिजली विभाग के अफसर उस पर कुडंली मारे बैठे है। जाहिर है अगर मामला फाइल तक पहुंचा तो अफसरों की पोल खुलेगी और कागजों में दर्ज उनका भ्रष्टाचार उन्हें जेल की सलाखों तक ले जा सकता है।

जब यह मामला विद्युत निगम एमडी बीबी पन्त तक पहुंचा तो उन्होंने इस पूरे मामले की जांच के आदेश अधीक्षण अभियन्ता प्रथम वीके अग्रवाल को दिये है।

हालांकि वीके अग्रवाल का कहना है कि उनके संज्ञान में यह मामला आया है जो गम्भीर है इसकी जांच की जा रही है। इसमें शामिल सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी।

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