थम गया पूरा शहर जब सड़कों पर उतरे किसान

bhakuसरकार के गन्ना समर्थन मूल्य और 145 गांवों की बिजली काटने के खिलाफ बुलंदशहर के सैकडों किसानों ने शनिवार को सरकार के खिलाफ सडकों पर उतरे आये।

किसानों ने जुलूस निकालकर कलैक्ट्रेट तिराहे पर गन्ने डालकर चक्का जाम कर दिया। करीब 2 घंटे तक किसान और पुलिस-प्रशासन के अफसर सडकों पर अडे रहे।

किसानों ने कहा कि पावर कारपोरेशन के अफसरों ने 145 गांवों की बिजली काट दी है और 155 गांवों ऐसे है जिनकी बिजली अगले दो दिन में काट दी जायेगी।

बिजली अफसरों ने ऐसा कदम उस जिले में उठाया है जब बारिस न होने से पहले से ही सुखाग्रस्त घोषित है और हजारों गन्ना किसान के बकाये का भुगतान अब तक नही हुआ है।

बुलंदशहर से लेकर लखनऊ तक किसानों की फरियाद सुनने वाला कोई नही है। लाखों किसानों के घरों की बिजली बंद करके बिजली विभाग के अफसर चेन की नींद सो रहे है।

किसानों के खेत सूखे पडे है और नलकूप बंद है। पानी नही होगा तो खेत में फसल कैसे उगेगी। अखिलेश राज मे किसान कराहने लगा है।

बुलंदशहर में बीते 5 दिनों से हर रोज पूरे के पूरे गांवों की बिजली काटी जा रही है। बिजली न आने से परीक्षाओं की तैयारियों में जुटे किसान के बच्चे पढाई से दूर हो गये है। खेत सूखे है और खेती ठप्प पडी है लेकिन बिजली का कहर जारी है।

बुलंदशहर के जिन गांवों की बिजली अफसरों ने बिजली काटी है वहां 40 से 70 फीसदी तक ग्राहक बकायेदार है।

बिजली का समय से भुगतान करने वालों की फिक्र छोडकर बिजली अफसरों ने पूरे गांवों की सामूहिक रूप से बिजली काट दी।

लेकिन बिजली विभाग के अफसरों को इस बात की चिंता नही है कि पहले से ही सूखा और गन्ना किसानों के बकाये की समस्या से जूझ रहे किसानों के पास जब पैसा ही नही है तो किसके घर में डकैती डालकर बिजली अफसरों का खजाना भरे।

बिजली अफसरों की करतूत पर जिले के सपा नेता चुप है। ऐसे में सवाल यह है कि ये अफसर किसान हितैषी होने का दावा करने वाली अखिलेश सरकार की कौन सी छबि जनता को दिखाना चाह रहे है।

सरकार के गन्ना समर्थन मूल्य के खिलाफ प्रदेश व्यापी आंदोलन के तहत बुलंदशहर के सैकडों किसान ने सरकार के खिलाफ सडकों पर उतरे आये।

भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले जिले में जुलूस निकालकर कलैक्ट्रेट तिराहे पर पहुंचे किसानों ने सडक पर गन्ने डालकर चक्का जाम कर दिया।

करीब 2 घंटों तक किसान और पुलिस-प्रशासन के अफसर सडकों पर अडे रहे। इस दौरान चारों और दूर-दूर तक जाम लग गया।

भाकियू कार्यकर्ताओं के साथ पहुंचे किसानों ने सरकार की मुखालफत करते हुए गन्ना समर्थन मूल्य बढ़ाने की मांग को लेकर जमकर नारेबाजी की।

किसानों के पास उनका मांगपत्र लेने पहुंचे एडीएम फाइनेंस को मौके से लौटा दिया गया। बाद में अपर आयुक्त चिंटूराम पटेल ने किसानों से वार्ता की और उनका मांगपत्र लिया।

साईकिल उठा किया प्रदर्शन

भाकियू के कार्यकर्ताओं ने अपने हाथों में साईकिल उठाकर प्रदेश सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। किसानों का कहना था कि सपा सरकार के राज में किसान सबसे ज्यादा परेशान है।

145 गांवों की बिजली काट ली गयी अब किसान कैसे अपनी फसल बोयेगा। किसान को उनके गन्ने का बकाया भुगतान भी नही मिला है अब किसान क्या करेगा।

भारतीय किसान यूनियन के नेता मांगेराम त्यागी का कहना है कि अभी तक गन्ने का बकाया भूगतान नही किया गया है। वहीं, 145 गांवों की बिजली काट दी गयी है, किसान अपनी फलस कैसे बोये। अगर बिजली चालू नही की गयी तो सभी किसान एक जूट होकर बिजली घर को तहस-नहस कर देगे।

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