गाजर किसानों की सक्सेस स्टोरी अब देश-विदेश तक

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बुलंदशहर। खेती के परम्परागत तरीकों से हटकर खेती करने वाले बुलंदशहर के गाजर किसानों ने अपनी गाजर का स्वाद अब देश-विदेश तक पहुंचा दिया है।

12 साल पहले 5 एकड गाजर की खेती से शुरूआत करके कामयाबी की बुलंदी छूने वाले ये किसान अब हर साल 50 हजार टन से ज्यादा गाजर पैदा कर रहे है।

इस उत्पादन को और ज्यादा बढ़ाने के लिए बुलंदशहर में रूरल इन्ट्रीगे्रटिड एग्री हब की बुनियाद रखी जा रही है। जिसके शिलान्यास प्रदेश के मुख्यमंत्री करेगें। सीएम अखिलेश यादव इन किसानों से मिलकर उनकी खेती के तौर-तरीकों के साथ उनकी सक्सेज स्टोरी भी सुनेगे।

बुलंदशहर के लालकृष्ण यादव खलिस किसान है और उनके बचपन से साथी सुभष देशवाल सेना से रिटायर्ड कर्नल। सेना को अपनी सेवाऐं देने के बाद कर्नल देशवाल अपने साथी लालकृष्ण यादव के साथ मिलकर सन् 2002 में खेती की शुरूआत की।

प्रचलित फसलों से अलग समझे जाने वाली गाजर की फसल उगाने के लिए उन्होंने 5 एकड जमीन में प्रयोग किया और फिर तकनीक, बाजार और अपनी काबलियत के बलबूते इसे हजारों एकड के उत्पादन तक ले आए।

सिकन्द्राबाद के किसान एक एकड़ जमीन में 15 हजार की लागत से 25 से 30 टन गाजर पैदा करते है। जिसकी बाजारी कीमत 60 से 70 हजार रूपए तक है।

गाजर की खेती के लिए उन्होंने देश-विदेश की कृषि मशीनों का इस्तैमाल किया और फिर उन्ही मशीनों को अपनी जरूरत के हिसाब से खुद ईजाद किया और किसान उनसे जुडते चले गए। आज इन किसानों की विलायती गाजर की मांग देश के सभी राज्यों समेत विदेशों तक में है।

लालकृष्ण यादव बताते है कि उन्होने जब गाजर की खेती की शुरूआत की तो लोग उन पर हँसते थे। उन्होने 12 साल पहले 8 लाख रूपये की मशीन इटली से मँगायी। लेकिन उनकी खेती का लागत बहुत बढ़ गयी।

पंजाब के एक कृषि उपकरण इंजीनियर की मदद से उन्होने अपनी जरूरतों के मुताबित देशी मशीनों को ढाला। बुबाई से लेकर गाजर काटने तक की मशीनों का ईजाद किया और इस तरह फसल की लागत घटती चली गयी।

यादव और कर्नल की जोड़ी के नाम से मशहूर ये किसान गाजर को उगाकर उसे स्टोर करते है और ऑफ सीजन में अच्छे मुनाफे के साथ उसे बाजार में बेचते है। गाजर की खेती के उत्पादन का दायरा अब 50 हजार टन पार कर गया है।

सही वक्त पर सही बाजार में गाजर को पहुंचाने के लिए अब गाजर किसान रूरल इन्ट्रीगेटिड एग्री हब की शुरूआत करने जा रहे है जिसमें गाजर को स्टोर करने के अलावा उसके पैकेजिंग और ब्रांडिग की आधुनिक सुविधाऐं होगी।

गाजर की खेती को नये आयाम देने वाले कर्नल सुभाष देशवाल बताते है कि एग्री हब बनाने के एप्रूबल की लागत इसकी जमीन से 10 गुना ज्यादा था।

विकास प्राधिकरण हमें किसान नहीए उद्योगपति के किरदार में देखता था। हजारों किसानों का सपना चूर-चूर होने वाला था। कानून में संसोधन के लिए गाजर किसान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिले।

मुख्यमंत्री ने गाजर किसानों की कामयाबी की ऐसी कहानी सुनी जो देश के किसानों के लिए नजीर है। मुख्यमंत्री ने हमारी खेती की तकनीक और बाजार पर हमारी पकड़ को सराहा और हम जैसे किसानों को प्रोत्साहन देने के लिए 24 घंटे के अंदर कैबिनेट में प्रस्ताव पास करके कानून में बदलाव कर दिया।

अब बडे पैमाने पर हार्टीकल्चर खेती करने वाले प्रदेश के किसान अपने प्रॉडक्ट को स्टोर और पैकेजिंग के लिए खेत में ही कोल्डस्टोर या एग्री हब बना सकेगें। बुलंदशहर के गाजर किसानों के लिए मुख्यमंत्री ने जमीन से जुडा कानून बदल दिया है।

खेती से लेकर बाजार तक बुलंदी छूने की कहानी रचने वाले इन गाजर किसानों की सक्सेज स्टोरी सुनने मुख्यमंत्री अखिलेश 3 फरवरी को सिकन्द्राबाद में होगें। मुख्यमंत्री गाजर किसानों के जिस एग्री हब की आधारशिला रखेगें, वह देश प्रदेश में अपने तरीके का पहला एग्री हब होगा।

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