बैंक अफसरों की साजिश, लालबत्ती और तख्ता पलटने की तैयारी

lal-batti

बुलंदशहर। जिला कॉपरेटिव चेअरमैन की कुर्सी को लेकर कॉपरेटिव बैंक के अफसरों की साजिश और सैकडों करोडो रूपए के घोटाले की कहानी गर्माती जा रही है।

लालबत्ती को लेकर हो रहे घमासान में बैंक के अफसरों ने बोर्ड के कुछेक सदस्यों के साथ मिलकर कॉपरेटिव चेअरमैन डा. तेजवीर सिंह के तख्ता पलटने का दावा किया है। लेकिन जिला प्रशासन से छुपायी गयी इस प्रक्रिया में चेअरमैन डा. तेजवीर सिंह समेत बोर्ड के 4 सदस्यों को चार्जशीट की कॉपी तक नही दी गयी।

माना जा रहा है कि 640 करोड रूपए प्रति वर्ष के टर्नओवर वाली इस संस्था में सैकडो करोड के घोटाले पर परदा डालने के लिए डीआर कापरेटिव राजीव यादव की सरपरस्ती में यह खेल खेला गया है।

23 फरवरी को बुलंदशहर जिला कापरेटिव बैंक के अफसरों ने चेअरमैन डा. तेजवीर सिंह की कुर्सी पलटने का दावा किया है। बताया गया कि बैंक के चेअरमैन डा. तेजवीर सिंह ने वोटरलिस्ट में फर्जीवाडा करके पहले बैंक के डायरेक्टर और फिर चेअरमैन की कुर्सी को हथिया ली।

बैंक के अफसरों ने दूसरी बार इस मामले में जांच करके तेजवीर समेत 4 सदस्यों को अयोग्य पाया और चुपचाप हुई बोर्ड मीटिंग में तेजवीर सिंह की छुटटी कर दी गयी।

बुलंदशहर का जिला सहकारी बैंक बीते 10 महीनों से विवादों के घेरे में है। यहां तैनात रहे पूर्व जीएम महेश यादव पर सोसाइटियों के सचिवों के साथ मिलकर कई करोड के सरकारी धन को गबन करने के आरोप में जांच चल रही है।

इतना ही नही, पहासू सोसाइटी के सचिव वेदप्रकाश की 19 बीघा जमीन और 60 लाख रूपए की कीमत का शोरूम पूर्व जीएम महेश यादव और बैंक मैनेजर प्रकाशनंद ने मिलकर अपने नाम करा लिया। वेदप्रकाश पर सरकारी धन के गबन के आरोप थे।

डा. तेजवीर सिंह ने डीएम से की शिकायत में आरोप लगाया है कि उनके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई सरकारी धन के लुटेरों के खिलाफ मोर्चा खोलने के बदला है।

चेअरमैन को हटाने की बोर्ड बैठक की जानकारी जिले के प्रशासनिक अधिकारियों से भी छुपी नही है। बोर्ड बैठक की वीडियोग्राफी नही हुई और न ही नियमों का पालन करते हुए वर्तमान जीएम सतीश शर्मा ने सदस्यों को चार्जशीट की कापी मुहैया कराई।

आरोप है कि पूरा खेल मेरठ में बैठे डिप्टी रजिस्ट्रार और सहकारिता उप आयुक्त राजीव यादव के इशारे पर खेला गया। पूर्व जीएम महेश यादव के घोटालों पर धूल डालने के लिए डा. तेजवीर सिंह पर पहले से दबाब बनाया जा रहा था और जब बात नही बनी तो जांचों का पिटारा खोलकर अफसरों ने डा. सिंह को हटाने की सिफारिश शासन को भेजी दी।

शासन ने इस सिफारिश पर अभी कोई फैसला नही किया है। जिला प्रशासन भी इस प्रक्रिया से अंजान है। जिला प्रशासन ने पूरे मामले को शासन के संज्ञान में लाते हुए मजिस्ट्रेट से जांच कराने का फैसला किया है।

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