तो इसलिए दिलनवाज के लिए दरियादिल हैं आजम खान!

(नरेन्द्र की रिपोर्ट)

बुलंदशहर के कांग्रेसी विधायक दिलनबाज खान और उनके खास चचा यूपी के ताकतवर मंत्री आजम खान के रिश्ते की बुनियाद बेपनाह मुहब्बत नही, बल्कि सियासी स्वार्थो से उपजी ऐसी दास्तां है जिसे न तो जनता पसंद करती है और न ही सियासी लोग। भतीजे दिलनबाज ने मुजफ्फरनगर दंगों की जॉच में फँसे चचा आजम की हद पार जाकर मदद की थी। आजम अब भतीजे के उस एहसान को चुकाने के लिए उस पर सरकारी तोहफों की बारिस कर रहे है। कांग्रेस विधायक और समाजवादी सरकार के मंत्री की यह रिश्तेदारी दोनो पार्टियों के नेताओं की आंखों में शूल बनकर चुभ रही है।

01

स्याना विधानसभा सीट से अपने मरहूम वालिद इम्तियाज मुहम्मद खाँ की मौत के बाद ‘हमदर्दी वोट’ पाकर विधायक बने दिलनबाज में इलाके के लोगो ने जिले के शानदार नेता इम्तिजाम मुहम्मद खाँ की तस्वीर देखी थी। लेकिन वक्त के साथ भ्रम टूटता चला गया। मुजफ्फरनगर दंगों के दौरान एक न्यूज चैनल के स्टिंग आपरेशन को लेकर खतरे में आये आजमखाँ के सवालों के कटघरे में घिरने के बाद राज्य सरकार ने एक कमेटी बनायी, दिलनबाज उसी कमेटी के सदस्य थे। इस कमेटी ने दंगों में आजमखाँ की भूमिका की जॉच की और आजम को क्लीनचिट देकर आरोपों से बरी कर दिया। दिलनबाज और आजम की मुहब्बत उसी वक्त परवान चढ़ी थी।

मांडू आश्रम पर आयोजित रैली में आजम ने अवाम को बताया कि इम्तियाज मुहम्मद खाँ और वह..एएमयू (अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय) के दिनों के साथी है। लेकिन खालिस कांग्रेसी रहे इम्तियाज के सुख-दुख में कभी आजम को शरीक होते नही देखा गया। आजम ने इस रैली में कांग्रेस पार्टी को दिलनबाज की मौजूदगी में ‘कागज की नाव’ कहा। चचा आजम से अपने रिश्ते निभाते हुए दिलनबाज ‘सियासी बेशर्मी’ साधकर कांग्रेस की जलालत सहते रहे।

03

कांग्रेस पार्टी को दिलनबाज के किरदार और आजम की टिप्पणियों पर अब ऐतराज होने लगा है। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता चौ0 श्यौपालसिंह कहते है कि दिलनबाज को उनके वालिद की सेवाओं को देखते हुए पार्टी ने टिकट दिया था और चुनाव भी जिताया। लेकिन अब विधायक के पास पार्टी गतिविधियों के लिए वक्त नही होता। वह हमेशा ‘आजम दरबार’ में नजर आते है। उनके एहसानों का बदला चुकाने के लिए आजम उन पर मेहरबानियों की बरसात करें, पार्टी को कोई ऐतराज नही, लेकिन कांग्रेस को ‘कागज की नाव’ कहने वाले समझ लें कि दरिया तो छोटी कश्ती भी पार करती है। पार्टी हाईकमान ने आजम की शान में दिलनबाज की हरकत को पार्टी विरोधी गतिविधि माना है और जल्द ही विधायक के खिलाफ ऐक्शन होगा।

अब आजम के एहसानों की बदौलत दिलनबाज की ताकत समझिये। जिले के कलैक्टर और कप्तान से लेकर समाजवादी पार्टी के किसी कद्दावर नेता की इतनी हैसियत नही कि दिलनबाज का मुखालफत कर सके। वजह दिलनबाज के चचा आजम खाँ का खौफ समझिये। 2002 से स्याना में समाजवादी पार्टी के लिए जमीन तैयार कर रहे ठा0 सुनीलसिंह ने कई इलैक्शनों में 40 हजार से ज्यादा वोट पाये है। इस बार 2017 में सपा के टिकट के लिए उनकी दावेदारी तय मानी जा रही थी, लेकिन आजम का दिलनबाज के लिए रैली करना और फिर रैली में यह कहना कि अगर पब्लिक दिलनबाज को पसंद करेगी तो दिलनबाज गांधी परिवार का दामन छोड़कर समाजवादियों की पांत में शामिल हो जायेगे, ठा0 सुनीलसिंह के लिए संदेश दे गया कि वह अब स्याना से अपना पत्ता साफ मानें। टिकट दिलाने के मामले में आजम की ताकत की नजीर 2012  में सिकन्द्राबाद से बदरूल इस्लाम का वह टिकट था जो लालू के समधी और मुलायम के खासमखास जितेन्द्र यादव की उम्मीदवारी खत्म करके उन्हें दिया गया। बदरूल इस सीट से बुरी तरह चुनाव हारे थे। ठा0 सुनीलसिंह की हालत उस मेहमान की तरह है जो मेजबान के सामने बैठकर गर्म पकौड़ी मुँह में डाल बैठा है।

02

आजम खाँ की कृपा की बदौलत दिलनबाज पिछले सालों में ‘रईसी’ भी पा गये है। जिले के कई ऐसे बड़े मामले रहे जिनमें दिलनबाज ने आजम से शिकायत करके जॉचें शुरू करायी और फिर उन जॉचों को भुनाकर रूपये कमाने के आरोप उन पर लगे। डूडा अधिकारी आसमुहम्मद के भ्रष्टाचार की शिकायत, कांग्रेस विधायक बंशी पहाड़िया के क्षेत्र पॉटरी सिटी खुर्जा में अवैध केरोसिन के बड़े पैमाने पर इस्तैमाल की शिकायत, सिटी के डीएम रोड पर निजी जमीन को पोखर बताकर मुरादाबाद के कमिश्नर से उसकी जॉच कराया जाना। ये सब ऐसे मामले है जो जनता के हितों से जुड़े होते तो दिलनबाज विधायक होने के नाते उन्हें विधानसभा में उठा सकते थे, लेकिन इस सब मामलों में उनकी शिकायत आजम खाँ तक गयी। वजह केवल यही है कि आजम से जॉच का जिन्न निकलवा कर वह उसे जिधर चाहे, आसानी से मोड़ सकते है और वह हासिल कर सकते है जिसकी दिलनबाज को ख्वाहिश है।

अब आजम की ‘ईमानदारी’ की नजीर सुनिये। दिसंबर-2014 में बुलंदशहर, शिकारपुर नगरपालिकाओं में घटिया इंटरलॉक टाइल्स का विकास कार्यो में बड़े पैमाने पर इस्तैमाल किया गया। जनशिकायतों के बाद डीएम और नगरपालिका के अफसरों का मौका मुआयना हुआ। तमाम वित्तीय अनियमितताऐं और ठेके-टैंडरों के घोटाले खुले। भारी-भरकम जॉच रिपोर्ट पालिका अध्यक्षों को बर्खास्त करने की सिफारिश के साथ शासन को भेजी गयी। आजम के निदेशालय ने अपनी टीम भेजकर विकास के निर्माणकार्यो की सैंपलिंग कराई। जनप्रतिनिधियों के रिश्तेदारों की उन टाइल्स फैक्ट्रियों के नमूने फेल गये जहाँ से नगरपालिका को सप्लाई की जा रही थी। मौके से लिए गये नमूने भी फेल हो गये। जनता आस लगाये बैठी है कि भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई होगी। लेकिन आजम जिस मोदी और भाजपा को हमेशा जुबानी भाले की नोंक पर रखते है, उसी भाजपा के नेताओं के खिलाफ आजम ने कार्रवाई तीन महीनों से लटका रखी है। शहर में चर्चा है कि भाजपाई-समाजवादियों से भ्रष्टाचार के मसले पर सैटिंग हो गयी है। इस पर आजम कहते है, “आप जानते है कि हमारे यहाँ रियासत नही होती” सही है जी आपके यहाँ रियायत नही होती, लेकिन जिंदा मक्खी को कोई कब तक निगलेगा आजम साहब!

Advertisements

Leave a Reply

Please log in using one of these methods to post your comment:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s