बिचैलियों और दूध कम्पनियों में छिडी जंग

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बुलंदशहर। दूध के कारोबार पर वर्चस्व को लेकर दूध ठेकेदारों और दूध कम्पनियों के बीच जंग एक बार फिर तेज हो गई है। बीते 24 घंटों से शुरू हुई दूध ठेकेदारों की हड़ताल ने अब पश्चिमी उप्र के बुलंदशहर, बदायू, अलीगढ़, मुरादाबाद सहित कई शहरों में हिंसक रूप अख्तियार कर लिया है।

दूध ठेकेदारों ने दूध कम्पनियों को किसानों से सीधे दूध नहीं खरीदने देने का ऐलान करते हुए कम्पनियों की गाड़ियों पर हमले शुरू कर दिये हैं। सैकड़ो कुन्तल दुध सड़कों पर बिखेरा जा रहा है साथ ही दूध कम्पनियों के कर्मचारियों पर नकाबपोश ठेकेदारों ने हमले शुरू कर दिए हैं। कानून व्यवस्था की स्थिति बनाये रखने के लिए बुलंदशहर के सभी थानों में हाईअलर्ट जारी कर दिया गया है। आगामी दिनों में कमीशन खोरी की इस जंग को लेकर दिल्ली में दूध की सप्लाई पर संकट के बादल मंडराते दिखायी दे रहे हैं।

दो साल पुरानी उन घटनाओं की यादें सहज ही ताजा हो जाती हैं। जब दूध के ठेकेदारों ने नामी गिरामी कम्पनियों के टेंकरों के मुँह सड़कों पर ही खोल दिए थे और हजारों कुन्तलों दूध बिखरने से सड़कें सफेद हो गयी थी। कमीशन को लेकर एक बार फिर ठेकेदारों ने कम्पनियों से बगावत कर दी है।

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पहले कम्पनियाँ ठेकेदारों की मारफत किसानों का दूध खरीदती थी। अब कम्पनियाँ सीधे किसानों के सम्पर्क में हैं। जिससे किसान और कम्पनी दोनों को फायदा हो रहा है और लगभग आठ रूपये प्रति लीटर का जो मार्जन बिचैलीये ठेकेदार की जेब में जाता था। वो अब किसान और दूध कम्पनी के बीच बंट रहा है। अपना धंधा चैपट होते देख बौखलाए ठेकेदार अब मारपीट और लूटपाट पर उतारू हैं।

एशिया में सबसे ज्यादा दूध उत्पादन करने वाले बुलंदशहर जनपद में रोजाना लगभग 15 लाख लीटर दूध का उत्पादन होता है। जिसमें से 8 से 10 लाख लीटर दूध नामी गिरामी ब्राण्डेड कम्पनियाँ खरीदती हैं और बाकी का दूध कापरेटिव सेक्टर की पराग, दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ, मदर डेरी आदि को जाता है। अधिकांश दूध की सप्लाई ब्राण्डेड कम्पनियां पौलीपेक के फॉरमेट में दिल्ली एनसीआर सहित कई राज्यों को सप्लाई करती हैं।

वर्तमान हालातों को देखकर इन कम्पनियों के मालिकों के होश उड़े हुए हैं। बीते 24 घंटे में दूध के कारोबार पर संकट खडा हो गया है। पूरी तरह से गुण्डागर्दी पर उतारू दूध ठेकेदारों के बगावती तेवर देखकर पुलिस के आला अधिकारी सकते में हैं। लिहाजा पूरे जिले के सभी थानों और कोतवाली में एसएसपी अनंतदेव तिवारी अलर्ट जारी कर दिया है।

सफेद दूध के काले कारोबार में मुनाफा ही मुनाफा है मगर वो मुनाफा या तो दूध कम्पनियों की तिजोरियों में जाता है या दूध ठेकेदारों की जेब में। नुकसान में हमेशा दुग्ध उत्पादक किसान रहता है या वो उपभोक्ता जिसे दिल्ली में दूध लगभग 50 रूपये प्रति लीटर मिलता है। किसान को जिस दूध की कीमत ठेकेदार से 30 रूपये मिलती है उसी दूध को ठेकेदार ब्राण्डेड कम्पनी को 35-36 रूपये प्रति लीटर बेचता है।

पाश्च्युराइजेशन, ट्रांसपोर्ट, लेबर और पैकिंग के बाद सभी प्रकार के टैक्स लगाकर दिल्ली में उपभोक्ता को यही दूध लगभग 50 रूपये प्रति लीटर मिलता है। कमीशन खोरी, मुनाफा खोरी, दलाली यदि खत्म हो जाये तो नुकसान में रहने वाले दुग्ध उत्पादक किसान और उपभोक्ता दोनों फायदे में आ सकते हैं। बहरहाल दूध ठेकेदारों और कम्पनियों के बीच छिड़ी जंग से दिल्ली में दूध की सप्लाई के बादल मंडराने लगे है।

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