खराब मौसम देख अन्नदातों के माथे पर चिंता

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बुलंदशहर। प्रकृति एक बार फिर अन्नदाता से रुठती दिख रही है। दिन रात मेहनत करने के बाद गेहूं की फसल पर मौसम की करवट ने उनकी नींद तो उड़ा ही दी है, वहीं माथे पर चिंता की लकीरें भी साफ दिखाई दे रही हैं।

पिछले दिनों हुई बारिश व तेज हवा के चलने से गेहूं की फसल 50 प्रतिशत बर्बाद हो चुकी है। खेतों में फसल की कटाई भी शुरु हो गई है। खड़ी हुई फसल के बाल में पानी जाने से भी उत्पादन की गुणवत्ता में भी कमी आने की संभावना है। बूंदाबांदी होने से गेहूं की फसल बुरी तरह से प्रभावित होती है। बारिश ने अन्नदाताओं की परेशानी और बढ़ा दी है।

कृषि विशेषज्ञ विजय कुमार शर्मा का कहना है कि बरसात के कारण पकने के बाद भीगी गेहूं की फसल को अधिक समय तक रोककर नहीं रखा जा सकता। वहीं उसके स्वाद में भी कमी आ जाती है। बाजार में ऐसे गेहूं के दाम कम हो जाते हैं। इस बरसात से किसानों को बहुत नुकसान हुआ है। इतना ही नही धूप न निकलने पर बाल में गलन शुरू हो जाती है। इससे दाना पूरी तरह से काला हो जाता है।

फसल के गीला होने पर उसकी बाल में बन रहा दाना पूर्ण रुप से विकसित नहीं होता। दाने की चमक धुंधली पड़ने के साथ रंग भी काला पड़ जाता है। रविवार की रात से मौसम फिर खराब हो गया है। आसमान में बादल मंडराने लगे है और तेज हवाएं चल रही है।

डीएम बी.चन्द्रकला ने बताया कि जिले के 1 लाख 22 हजार किसानों की गेहूं की फसल में 50 प्रतिशत का नुकसान हुआ है। शासन को नुकसान की भरपाई के लिए करीब 64 करोड़ रूपए की धनराशि मांगी गयी है, जिसमें शासन ने 28 करोड़ रूपए की किश्त भेजी है। 15 अप्रैल से मेघा कैम्प लगाकर किसानों को चैक वितरित किए जायेगे।

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