BJP की ‘आदर्श ग्राम योजन’ फेल, सांसद ले रहे हैं मौज

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बीजेपी के मोदीराज में अर्थव्यवस्था, मँहगाई, सुशासन में क्या-क्या बदला…आम आदमी को इसकी फिक्र नही। उसे फिक्र है तो अपने गाँव-गली और मुहल्ले की…जिसमें बीते एक साल में रत्ती भर भी फर्क नही आया। बिल्कुल ऐसी ही हालात सांसदों के उन गाँव के है जो पीएम नरेन्द्रमोदी के आह्वान पर गोद लिये गये थे।

नरेन्द्र मोदी के जयापुर की तरह सांसदों के ये गाँव हाईटेक और आदर्श बनना तो दूर…उन योजनाओं से भी अछूते है जो सामान्यतया हरेक गाँव में पहुँचती है। बुलंदशहर के भोपतपुर गाँव की कहानी भी कुछ इसी तरह है..जिसे लेकर सपने तो आसमान के देखे गये, लेकिन बुलंदशहर के बीजेपी सांसद डॉ0 भोलासिंह ने गाँव को गोद लेने की रस्म के बाद इधर मुड़कर आज तक नही देखा।

गांव में वहीं टूटी सड़के, उफनती नालियां और बेदम खड़े बिजली के खंभे है। एक साल में एक इंच भी प्रगति के पथ पर नही बढ़ा सांसदजी का गाँव। संसद और बिजनेस में बिजी बीजेपी के सांसद ने नही खींचा विकास का खाका। नरेन्द्रमोदी के सपने की रस्म अदायगी कर गाँव को भूल गये एमपी साहब।

भोपतपुर….बुलंदशहर जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर ये वह गाँव है जिसमें साल भर पहले उम्मीदों की आतिशबाजियां फोड़ी गयी, सपनों के गुब्बारे उड़ाये गये, टूटे खरंजों पर विकासशील गाँव का जश्न भी मना लिया गया और पूरी हो गयी विकास के लिए गाँव को गोद लेने की रस्म।

ये सारे ख्वाब बुलंदशहर के बीजेपी सांसद डॉ0 भोलासिंह ने इस गाँव के वाशिंदों को दिखाये थे। लेकिन गाँव को गोद लेने के जश्न से सांसदजी ऐसे थके कि पूरे साल सोते रहे। गांव का विकास तो दूर गोद लिये गये गाँव की सामाजिक जिम्मेवारियां तक भोलासिंह ने नही निभाई। बाकी गाँवों की तरह टूटी सड़के, गंदगी से बजबजाते नाले, गाँव के कचरे से पटी पड़ी पोखर…सब कुछ बीते 365 दिन में पुरानी सालों की तरह कायम रहा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्रमोदी ने विकास के हाशिये पर खड़े गाँवों को विकास की धारा से मिलाने के लिए सांसद आदर्श गाँव योजना की शुरूआत की थी। इन गाँवों में केन्द्र और राज्य की योजनाओं के आने के लिए सांसद को द्वार खोलने थे। इन गाँवों को कोई स्पेशल बजट नही था, लेकिन गाँव को गोद लेने के बाद यह सांसद की जिम्मेवारी थी कि वह अपने प्रयासों से हरेक चालू योजना का लाभ इस गाँव तक लेकर आये। लेकिन बुलंदशहर के बीजेपी सांसद डॉ भोलासिंह पर भोपतपुर के वाशिंदों ने अनदेखी के आरोप लगाये है।

दरअसल, रिअर स्टेट के बिजनैसमैन डॉ0 भोलासिंह को बिजनैस से इतर जो समय मिलता है वह संसद और पार्टी के कामों में खर्च होता है। अब इन ऊबड़-खाबड़ गाँवों में भटकना ही उनके भाग्य में था तो जनता ने उन्हें सांसद क्यों बनाया। जनता के सवाल नेताओं को चुभने लगे है।

आदर्श ग्राम योजना के तहत सांसद को गाँव में विकास का खाका खींचना था। सारी योजनाऐं एक रणनीति के तहत कागज पर होती और फिर जिला और राज्य स्तर से लेकर दिल्ली तक इस गाँव की आवाज उठाने का काम सांसदजी करते। लेकिन आवाज उठाने का काम तो दूर सांसदजी शक्ल दिखाने से भी परहेज करते रहे। अब सवाल उठे तो सांसदजी ने अपनी जिम्मेवारी का ठींकरा यह कहकर राज्य सरकार के सिर फोड़ दिया कि अखिलेश राज में उनकी नही चलती।

ऐसा नही कि जिम्मेवारी से बचने का सांसद का यह आईडिया फनटास्टिक है। दरअसल, इसी रामबाण को हर वो नेता इस्तैमाल करता है जो अपनी जिम्मेवारियों से बचना चाहता है। दोष सांसदजी का नही, पीएम नरेन्द्रमोदी का है।

क्योंजी…जब जिम्मेवारी दी तो जबाबदेही क्यों तय नही की। कुछ सजा का भी इंतजाम रखते तो शायद आपका सपना सच होता। और फिर सब आपके जैसे देशप्रेमी और समर्पित थोड़े ही है…घर परिवार छोड़कर पूरे वक्त देश कल्याण की बातें करती रहे। पहली बार सांसद बने है तो कुछ मजे भी करने दो मोदीजी।

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