सस्ते आवास पाना लोगों के लिए बना सपना, प्राधिकरण को नहीं मिल रही जमीन

बुलंदशहर। लोगों के लिए सस्ते आवास पाना अब सपना बनकर रह गया हैं। प्राधिकरण एवं आवास विकास परिषद की स्थापना के तीन दशक बाद भी लोग आवासों से बहुत दूर हैं। प्राधिकरण और आवास विकास परिषद वर्षों से जमीन नहीं होने के कारण आवास की महत्वाकांक्षी योजना लांच नहीं कर पाया है।

भूमि अधिग्रहण बिल 2013 लागू होने के बाद विकास प्राधिकरण की बुलंदशहर में स्थापना ही बेमानी हो चली है। इस बिल के बाद प्राधिकरण किसी तरह दो ही कालोनी बसा पाया। बीडीए अधिकारियों का तो यहां तक कहना है कि 2013 का भूमि अधिग्रहण कानून इतना पेचीदा है कि अब नई कालोनी बसाया जाना संभव नहीं रह गया है।

जमीन की हैं किल्लत
लोगों के लिए सस्ते मकान बनाने के लिए जमीन न होना सबसे बडी रुकावट है। भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में लोच होने के कारण यह मुश्किल और बढ गयी है। एक तो दो-तिहाई से अधिक किसानों की रजामंदी होनी चाहिए। ऊपर से सर्किल रेट का चार गुना अधिक मुआवजा देने का प्रावधान है इससे प्रोजेक्ट कॉस्ट बढ़ जाएगी।

जिले में नहीं निजी कंपनियों को दिलचस्पी
दिल्ली से महज 80 किलोमीटर दूर होने के बावजूद जिले में कोई भी निजी कम्पनी आने को तैयार नहीं हैं। अंसल, ओमेक्स, सुपरटेक, गौड़ आदि रियल एस्टेट कंपनियों के बुलंदशहर में एक भी प्रोजेक्ट अभी तक नहीं आया है। ये कंपनियां बुलंदशहर में निवेश करने से कतरा रही हैं। सिकंदराबाद क्षेत्र में रियल एस्टेट को जरूर रिस्पांस मिला है, लेकिन कोई प्रोजेक्ट अब तक लांच नहीं हुआ है।

सरकार की अफोर्डेबल योजना भी फेल
प्रदेश की सपा सरकार ने सस्ते कीमत पर समाजवादी अफोर्डेबल होम की घोषणा की है। एमडीए ने पहले फेज में करीब 400 अफोर्डेबल आवास के लिए आवेदन निकाले हैं, लेकिन इसका रेट भी अफोर्ड करना आम आदमी के बस से बाहर है। एक तो इनके रेट अधिक हैं और दूसरे मांक के अनुरूप मात्र 400 आवास काफी कम है। सरकार की इस योजना के लिए अब तक किसी निजी कंपनी ने भी हाथ नहीं बढ़ाया है।

सरकार गिरते ही लोगों का टूटा सपना
पूर्ववर्ती बसपा सरकार ने कांशीराम शहरी गरीब आवास योजना शुरू की थी। बाद में सपा सरकार ने इस योजना को खारिज कर दिया। कांशीराम योजना के तहत तहसील के निकट करीब 500 मकान बनकर तैयार हैं, लेकिन मौजूदा सरकार द्वारा इसके आवंटन को लेकर कोई निर्देश आज तक प्राप्त नहीं हो सकें है। लिहाजा हालात जस के तस हैं और लोग झुग्गी और फूस के मकानों में रहने को मजबूर हैं।

मध्यम वर्ग के लोग भी परेशान
घरों की मांग तो है लेकिन उपलब्धता के माध्यम शून्य हो चुके हैं। जो नए बिल्डर कालोनी बना भी रहें हैं तो उनकी कीमतें आसमान छू रही है जो मध्यवर्ग की उम्मीद से बाहर हैं। इधर नगर पालिका ने निम्न वर्ग के लोगों के लिए आशियाना योजना का खाका तैयार किया था। इसके तहत यदि किसी के पास 40 वर्ग गज जमीन है, लेकिन वह मकान बनाने में सक्षम नहीं है तो नगर पालिका उसका पूरा ब्यौरा तैयार कर शासन से मकान बनाने के लिए धन उपलब्ध कराने की संस्तुति करेगी। योजना में खाका तैयार होने के अलावा कोई काम नहीं हो सका।

पालिका चेयरपर्सन पिंकी गर्ग की माने तो आशियाना योजना पर काम चल रहा है। पात्रों का ब्यौरा एकत्रित किया जा रहा है। इसके बाद शासन को संस्तुति के लिए भेजा जायेगा।

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