हॉरर किलिंग- कत्ल के लिए 8 माह का इंतजार और जेल गये बेगुनाह

बुलंदशहर। प्रेमियों के कत्लगाह के नाम से कुख्यात बुलंदशहर में एक और प्रेमी को आन के लिए मार दिया गया है। पेशे से फोटोग्राफर मनोज को 22 अगस्त को गोलियां मारकर कत्ल किया गया था और मनोज के परिवार ने अपने दुश्मनों को इस केस में नामजद करते हुए पुलिस से जेल भिजवा दिया। पुलिस की तफ्तीश में अब खुलासा हुआ है कि मनोज एक लड़की को प्यार करता था जिसे उससे घरवालों ने साथ-साथ देखा और कत्ल की साजिश रचकर उसे अंजाम दे डाला।

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जानकारी के मुताबिक बुलंदशहर के डिबाई में 22 अगस्त 2015 को हुए फोटोग्राफर मनोज हत्याकांड में पुलिस ने नामजद कैलाश और उसके दो साथी भोला और महेन्द्र को जेल भेजा था। लेकिन इस मामले में आगे की पुलिस तहकीकात ने पूरी वारदात का रूख मोड़ दिया। पुलिस की तफ्तीश में खुलासा हुआ है कि मनोज के हत्यारे कैलाश और उसके साथी नही, गोदना गाँव के निवासी इस्लाम और उसके बहनोई तस्लीम समेत 6 लोग है। पुलिस ने खुलासा किया है कि मनोज के प्रेमसंबध इस्लाम की बहिन खुशनुमा से थे। 14 दिसंबर 2014 को खुशनुमा अचानक गायब हो गयी। गाँववालों ने उसे मनोज के साथ देखा और खुशनुमा के घरवालों को खबर कर दी। बाद में जब खुशनुमा अपने घर पहुँची तो उसके बहनोई तस्लीम ने उसकी पिटाई की और उसके गायब होने का कारण पूछा। खुशनुमा ने स्वीकार किया कि वह मनोज से प्रेम करती है और गायब होने के दौरान वह उसी के साथ थी। खुशनुमा के परिवार ने उसी वक्त मनोज को ठिकाने लगाने का साजिश रच ली और केरल में रह रहे अपने भाइयों का इंतजार करने लगे।

22 अगस्त की शाम इस्लाम और उसके साथी डिबाई के नीम नदी के पास बैठकर मनोज का इंतजार करते रहे और जब मनोज अपनी दुकान बंद करके लौटा तो उन्होने उसे जबरन पकड़ लिया और उसे तमंचे से तीन गोलियां मारकर उसकी हत्या कर दी। अगली सुबह पुलिस ने मनोज का शव बरामद हुआ। इसके बाद मनोज के परिजन और गाँववाले मामले में नामजद लोगो की गिरफ्तारी के लिए शाम तक थाने का घेराव किये रहे और बदायूँ-दिल्ली राजमार्ग पर प्रदर्शनकारियों ने जाम भी लगाया।

एसपी देहात पंकज पांडेय ने बताया कि 6 में से दो आरोपियों को गिरफ्तार करके जेल भेजा जा रहा है। कैलाश समेत 3 को जेल से रिहा करने के लिए कोर्ट के सामने अर्जी पेश की गयी है। जल्द ही तीनों बेगुनाह जेल की सलाखों से बाहर हो जायेगे। बेकसूरों के जेल जाने का पुलिस को अफसोस है, लेकिन पुलिस ने सही तफ्तीश करके बेगुनाहों को जेल की सलाखों तक पहुँचाया है।

कैसे फँसे कैलाश और उसके साथी-
दरअसल, मनोज की शादी की बात कैलाश की बेटी सुनीता से चली थी। घरवाले मानते है कि मनोज और सुनीता एक-दूसरे को पसंद भी करते थे। लेकिन किसी बात पर शादी में विवाद पैदा हो गया और रिश्ता नही हो पाया। मनोज की हत्या के बाद उसके पिता कुँवरपाल ने उसकी हत्या के लिए सुनीता के परिजनों को ही जिम्मेवार ठहराया। सुनीता के परिजनों को नामजद करने के बाद गाँववालों ने उनकी गिरफ्तारी का दबाब भी बनाया जिसके चलते पुलिस को कैलाश और उनके दो साथियों को जेल भेजना पड़ा।

कत्ल की साजिश और 8 महीने का इंतजार-
दरअसल, खुशनुमा के दो भाई केरल में रहकर दरी बेचने का कारोबार करते है। उनकी आमद ईद के दौरान होती है। इसलिए मनोज के कत्ल के लिए ईद के आसपास का वक्त ही चुना गया। इसी दौरान कैलाश और कुँवरपाल के बीच मनोज-सुनीता की शादी को लेकर आयी दरार इस साजिश के लिए अच्छी साबित हुई। हत्यारों ने तय किया कि इस दरार का लाभ उठाते हुए कत्ल के आरोप कैलाश और उसके परिजनों पर डाला जायेगा। मनोज के कत्ल के बाद हुए हंगामा और प्रदर्शन के बीच कातिलों ने इस बात का फायदा भी उठाया।

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