अजमत को इंसाफ दिलाने के लिए परिजनों की भूख हड़ताल शुरू

बुलंदशहर। सरकारी अस्पताल के डाक्टर की लापरवाही के कारण यूपी पुलिस के सिपाही अजमत की मौत दिल्ली के अपोलो अस्पताल में 28 अक्टूबर की सुबह हो गयी थी। आरोपी डाक्टर को पुलिस ने अरेस्ट किया, लेकिन डाक्टरों के हड़ताल पर चल जाने के कारण डाक्टर को छोडना पडा। जिससे नाराज होकर अजमत के परिजनों ने कालाआम चैराहे पर एक दिन की सांकेतिक भूख हड़ताल की।

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सिपाही के परिजनों की भूखहड़ताल की जानकारी मिलने पर पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और परिजनों को समझा कर शांत किया। दिवंगत सिपाही के परिजनों ने पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को अल्टीमेटम दिया है कि अगर 72 घंटे के अदंर दोषी डाक्टर को गिरफ्तार व उनकी मांगे नहीं मानी गई तो वह फिर से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर देंगे। इस संबंध में सिटी मजिस्ट्रेट को एक ज्ञापन भी दिया है।

जिला अस्पताल के डाक्टर सचिन की लापरवाही के कारण एक पखवाड़ा तक जिंदगी और मौत से जंग लड़े रहे अजमत की 28 अक्टूबर दिन बुधवार की सुबह दिल्ली के अपोलो अस्पताल में मौत हो गई थी। डाक्टर सचिन की गिरफ्तारी व उसके मददगार दरोगा पर कार्रवाई के लिये परिजनों ने दो नवंबर से अनिश्चितकालीन भूखहड़ताल के एलान किया था।

अजमत की मां समरजहां, पिता नियामतुल्ला, चाचा लुकमान, बहन साइमाखान, निलोफर, भाई सुहैल, दिलबरजान ने राजा बाबू पार्क के बाहर अनिश्चितकालीन भूखहड़ताल शुरू कर दी। उनके समर्थन में स्थानीय लोगों ने भी भूखहड़ताल पर बैठ गये। अजमत की मां समरजहां ने बताया डाक्टर सचिन की लापरवही से उनके जाबांज बेटे की मौत हुई और पुलिस ने आरोपी डाक्टर को गिरफ्तार करने बाद छोड़ दिया। पुलिस ने डाक्टरों के दबाव में आकर आरोपी डाक्टर पर से धाराएं भी हटा दी।

अजमत की भाई सुहैल का आरोप था कि डाक्टर सचिन का एक भाई बुलंदशहर पुलिस में दरोगा है और उसके इशारे पर डा. सचिन को बचाने के लिये डाक्टरों ने हड़ताल की थी। आरोप है कि दरोगा ने ही डाक्टरों को धारा का ज्ञान दिया था। उन्होंने कहा कि अजमत की मौत को पांच दिन हो गये हैं और डाक्टर खुली हवा में सांस ले रहा है। मौके पर पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट डीपी सिंह व इंस्पेक्टर नगर कोतवाल आरके सिंह ने अजमत के परिजनों को समझाकर भूखहड़ताल समाप्त करा दी।

अजमत के परिजनों की मांग की थी कि तत्काल प्रभाव से डाक्टर को गिरफ्तार कर जेल भेजा जायें। साथ ही दोषी दरोगा पर विभागीय कार्रवाई की जाए। अजमत के एक भाई को सरकारी नौकरी दिलाई जाए और मामले की जांच किसी बाहरी एजेंसियों द्वारा कराकर उन्हें न्याय दिलाया जायें। अजमत के परिजनों ने पुलिस प्रशासन को अल्टीमेटम दिया है कि अगर 72 घंटे के अंदर आरोपी डाक्टर की गिरफ्तारी व दरोगा पर कार्रवाई नहीं की गई तो वह फिर से अनिश्चितकालीन भूखहड़ताल के लिये बाध्य हो जाएंगे।

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