नहीं मिला बढ़ा हुआ मुआवजा तो नहीं होगा काम: सोलंकी

रेलवे के खिलाफ सिकन्द्राबाद की बीजेपी विधायक विमला सोलंकी ने सैकडों किसानों के साथ मोर्चा खोल दिया है। बीजेपी विधायक ने आज किसानों का बढ़ा हुआ मुआवजा दिलाने के लिए कलेक्ट्रेट के गेट पर बैठकर प्रदर्शन किया। विधायक ने ऐलान किया है कि जब तक उन्हें बढा हुआ मुआवजा नहीं मिलता, रेलवे के डेडीकेटिड फ्रेट कॉरीडोर का काम बंद रखा जायेगा।

बीजेपी विधायक विमला सोलंकी और बीजेपी जिलाध्यक्ष डीके शर्मा के नेतृत्व में खानपुर और कादरपुर के सैकड़ों किसान प्रदर्शन करने बुधवार को कलैक्ट्रेट पहुँचे थे। पुलिस ने उन्हें कलैक्ट्रेट गेट पर रोका, जिससे नाराज होकर बीजेपी विधायक किसानों को साथ लेकर कलेक्ट्रैट के गेट पर बैठकर प्रदर्शन करने लगीं। हालांकि हंगामा और जिलाधिकारी के आदेश के बाद किसानों को कलैक्ट्रेट में एंट्री दे दी गयी। जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर इकठ्ठा किसानों को संबोधित करते हुए विमला सोलंकी ने कहा कि जब तक किसानों को बढ़ा हुआ मुआवजा नही मिलता, किसान आंदोलनरत रहेंगे और रेलवे के प्रोजेक्ट का काम आगे नहीं होने दिया जायेगा।

प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे जिलाध्यक्ष डीके शर्मा ने कहा कि रेलवे उनकी बात नही सुन रहा है। किसानों को जमीन का जो मुआवजा दिया जा रहा है वह बाजार में बिकने वाले कपड़े की कीमत से भी कम है। उन्होंने कहा कि अगर उनकी बात नहीं सुनी तो मेरठ कमिश्नरी का घेराव भी किया जायेगा। इसके बाद जिलाधिकारी बी. चन्द्रकला ने किसानों के बीच आकर विमला सोलंकी से ज्ञापन लिया और किसानों की मदद का आश्वासन दिया है।

जिलाधिकारी बी0 चन्द्रकला ने बताया कि इस मामले में फैसला जिला जज के कोर्ट में लंबित है। जिला प्रशासन के बूते के बाहर का मामला है। पूरे हालात से राज्य सरकार को अवगत करा दिया गया है। अब सरकार जो चाहे फैसला करे। उनके स्तर से हर हाल में किसानों की मदद की जायेगी।

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क्या है प्रोजेक्ट और मुआवजा

रेलवे उत्तर भारत में व्यवसायिक गतिविधियों के विस्तारीकरण के लिए डेडीकेटिड फ्रेट कॉरीडोर का निर्माण कर रहा है। जिसके लिए सन् 2012 से जमीनों का अधिग्रहण शुरू हुआ था। रेलवे के नियमों के तहत जिले के 56 गाँवों की जमीनें अधिग्रहीत की गयी। किसानों को सर्किल और बाजारी रेट के मुताबिक मुआवजा दिया गया। मंडलायुक्त की कोर्ट में अपील के बाद दो बार मुआवजा बढ़ाया गया। किसान तीन बार देय मुआवजा ले चुके हैं और चौथी बार मुआवजा बढ़ाने की मांग को लेकर जिला जज की अदालत में अपील कर चुके हैं। फिलहाल मामला जिला जज की अदालत में लंबित है।

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सियासी लाभ?

माना जा रहा है कि इस मुद्दे की अगुवा बनकर विधायक विमला सोलंकी आगामी ग्रामप्रधान चुनाव में अपनी सियासी जमीन और पक्की कर लेना चाहती हैं। 2012 विधानसभा चुनाव में विमला सोलंकी महज 250 वोटों से चुनाव जीती थीं। फिलहाल सिकन्द्राबाद के सियासी समीकरण भी बदले हैं इसलिए विधायक की कोशिश किसानों से जुड़े मुद्दे पर सियासत करके 2017 विधानसभा चुनावों में अपनी टिकट और जीत सुनिश्चित करना है।

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