6 साल से गायब सिपाही को तलाशने में नाकाम है पुलिस

पुलिस लाइन से यूपी पुलिस का एक सिपाही 6 साल पहले गायब हुआ और आज तक उसका कोई पता नहीं चला। सिपाही का परिवार अफसरों की चौखट पर फरियादें करता रहा और अधिकारी तारीख पर तारीख देते रहे। गायब हुए सिपाही के गम में उसके पिता भी स्वर्ग सिधार चुके हैं लेकिन पुलिस के पास सिपाही का कोई सुराग नहीं है।

यूपी पुलिस का सीपी न0 1425 अमरीश त्यागी बुलंदशहर पुलिसलाइन से 28 मई 2009 को अचानक लापता हो गया था। उस समय अमरीश त्यागी की तैनाती खुर्जा सिटी थाना में थी। उसको एक महीने के लिए चुनाव के कार्य से पुलिसलाइन भेजा गया था। परिवार ने लापता सिपाही की तलाश के लिए थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई, लेकिन पुलिस अमरीश को नही ढूँढ सकी। अमरीश की पत्नी पूनम ने बताया कि वह और उसके ससुर दर्जनों बार पुलिस अफसरों की चौखट पर फरियाद करने आये, लेकिन उसका कोई नतीजा नहीं निकला।

पूनम ने बताया कि अमरीश के तीन बच्चों में दो बेटियां और एक बेटा है। सबसे बड़ी बेटी अब ग्रेजुएशन कर चुकी है और उसकी शादी की चिंता खाये जा रही है। पूनम ने पहाड़ जैसी मुश्किलें झेलकर किसी तरह बच्चों को पढ़ाया-लिखाया मगर पुलिस विभाग ने उनकी मदद के एक फूटी कौड़ी तक नहीं दी।

पूनम के ससुर की 5 बीघा खेती में से उन्हें साल भर खाने का अनाज मिल जाया करता था। लेकिन बेटे के गम में ससुर के स्वर्ग सिधारने के बाद पूनम के हाथ से ये सहारा भी जाता रहा। फिलहाल परिवार गाजियाबाद के काजीपुर गांव में किसी तरह अपना जीवन यापन कर रहा है।

पूनम जब भी अफसरों से फरियाद करती है उसे अमरीश के लापता होने के सात साल पूरे होने तक इंतजार करने को कहा जाता है। सात साल पूरे होने के बाद पुलिस विभाग अमरीश को मृत मान लेगा और उसकी नौकरी के लाभ परिवार को मिलेंगे।

दोनो बेटियां ट्यूशन पढ़ाकर पाल रही हैं परिवार

पूनम की बड़ी बेटी ग्रेजुएट है और छोटी 12वीं पास कर चुकी है। दोनो बेटियां परिवार के मुश्किल वक्त में मां का बड़ा सहारा बनी हैं। दोनों बेटियां गाँव के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती है और उससे मिलने वाले धन से अपने परिवार का गुजारा करती हैं।

गम में चले गये ससुर, जेठ का नहीं मिला सहारा

पूनम ने बताया कि अमरीश के गायब होने के बाद उससे ससुर ने उसे तलाशने के लिए बहुत मेहनत की। लेकिन पुलिस की हीलाहवाली के सामने उनकी कोशिशें व्यर्थ रहीं। एक साल पहले उनका स्वर्गवास हो गया। इसके बाद से उनके नाम की खेती से आने वाला अनाज बंद हो गया। खेती में हिस्से के नाम पर उन्हें 10-15 हजार रूपये प्रति बर्ष दे दिये जाते हैं। पूनम के जेठ अपने परिवार के साथ अलग हैं। पूनम की मुश्किल घड़ी में उन्होंने उसे कोई मदद नहीं की।

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