50 प्रतिशत युवाओं में स्पाइन की होती है परेशानी

रीढ की समस्याओं के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए एक निःशुल्क कैम्प का आयोजन किया गया। कैम्प में फोर्टिस हाॅस्पिटल के स्पाइन एवं न्यूरों सर्जन ने कमर दर्द, स्पाइन टयूमर, स्पाडिलाइटिस, सियाटिक, सर्वाइकल दर्द, स्लिप डिस्क, पीआईवीडी तथा रीढ़ की हडडी जैसी बीमारियों की जानकारी दी।

फोर्टिस हाॅस्पिटल के स्पाइन एवं न्यूरों सर्जन डाक्टर राहुल गुप्ता ने बताया कि हमारे देश में रीढ़ की समस्या आज कल आम बात हो गयी है। उन्होंने बताया कि युवाओं में ज्यादातर यह समस्या पाई जा रही है। कई लोग कमर दर्द एवं गर्दन के दर्द को अनदेखा कर देते है जबकि कई लोग इसका इलाज कराने के लिए नीम हकीमों अथवा नाईयों के पास चले जाते है और अपनी रीढ़ एवं गदर्न तुडवा बैठते है।

डाक्टर गुप्ता ने बताया कि स्पाइन की परेशानी का सबसे बडा कारण गलत जीवन शैली है। जिसमें सुधार करके हम इस तकलीफ से बच सकते है। बताया कि रहन-सहन, काम-काज के नये तौर तरीके, फैशन, व्यायाम आदि से बचने की प्रवृति कमर के लिए कहर बन गयी है।

क्या है कारण-
डाक्टर राहुल ने बताया कि ऊंची एडी के जूते चप्पलों के प्रयोग, घर और आफिस के तनाव, भाग-दौड, लगातार झुक कर बैठना, देर तक कम्प्यूटर पर काम करना जैसे कारणों से कमर में दर्द के मामलों में 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। तेजी से बढ़ता फैशन कमर दर्द का एक प्रमुख कारण है।

रीढ़ की समस्याओं पर है भ्रांतिया-
डाक्टर राहुल ने बताय कि देश में रीढ़ की समस्याओं को लेकर कई तरह की भ्रांतिया कायम है। इन भ्रांति में एक भ्रांति यह है कि स्पाइन की सर्जरी असुरक्षित है जबकि सच्चाई यह है कि स्पाइनल इंस्टमेंटेशन, एनेस्थेटिक तकनीकें, इंट्रा ऑपरेटिव इमेजिन, इंट्रा ऑपरेटिव स्पाइनल कार्ड मानिटरिंग, ब्लड ऑटो ट्रांस फयूजन तथा नैविगेशन जैसी तकनीकों की मदद से रीढ़ की सर्जरी आसान व सुरक्षित एवं कारगर हो गयी है।

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