गन्ना कारोबार पर अपराध की काली छाया का खुलासा

बुलंदशहर। पहासू इलाके में स्थित त्रिवेणी ग्रुप की साबितगढ़ शुगरमिल और बुलंदशहर के गन्ना किसानों की फसल को कब्जाने की खूनी साजिश का पुलिस ने खुलासा किया है। इस खूनी साजिश के तहत महीने भर पहले कुख्यात बदमाश मुकेश हजरतपुरिया ने एक केन मैनेजर की बेरहमी से हत्या कर दी थी। पुलिस ने इस साजिश के मास्टरमाइंड मुकेश हजरतपुरिया के पिता समेत गैंग के 5 शूटर अरेस्ट किये है। पुलिस के रडार पर आये हजरतपुरिया गैंग के डेढ़ दर्जन बदमाश इलाके की गन्ना फसल के साथ साबितगढ़ शुगरमिल के मैनेजमेंट पर कब्जा करना चाहते थे।
जानकारी के मुताबिक 29 अक्टूबर 2015 को बुलंदशहर की साबितगढ़ शुगरमिल में केन मैनेजर लोकेन्द्र की 6 गोलियां मारकर नहर किनारे बेरहमी से हत्या कर दी गयी। पुलिस को इस हत्या के तार जोड़ने में महीना भर तो लगा, लेकिन तहकीकात में एक ऐसी साजिश का खुलासा हुआ जिसमे अर्थशास्त्रियों के पसीने छुड़ा दिये। अब तक लूट, मर्डर, रंगदारी, सुपारी किलिंग और अपहरण करने वाले जतनसिरोही गैंग का सरगना मुकेश हजरतपुरिया कमाई का बड़ा जरिया तलाश चुका है। मुकेश ने अपने गैंग के साथ मिलकर बुलंदशहर के गन्ना किसानों की करोड़ो की फसल कौड़ियों में खरीदकर उससे वारे-न्यारे करना शुरू कर दिये है। केन मैनेजर लोकेन्द्र की हत्या करोड़ो की कमाई की उसी खूनी साजिश का एक हिस्सा थी।
पुलिस कांफ्रेस में पुलिस के सामने हजरतपुरिया गैंग के शूटर हरेन्द्र फौजी ने बताया कि मुकेश और उसका गैंग दो महीने पहले साबितगढ़ शुगरमिल के डीजीएम को मारने के लिए गये थे। कारोबार पर दबदबे को लेकर डीजीएम से हो रही बातचीत में लोकेन्द्र ने दखल दिया और मुकेश को अपशब्द भी कहे। लोकेन्द्र की हत्या उसी घटना का बदला थी। पापड़ी गाँव में लोकेन्द्र को पहले अगवा किया और फिर नहर के किनारे ले जाकर मार डाला।
सूत्रों के मुताबिक मुकेश ने अपने इलाके में आने वाली साबितगढ़ शुगरमिल के तौलकांटे बंद करा दिये और खुद के तौलकांटे गाँव-गाँव में लगवा दिये। गन्ना किसानों को हजरतपुरिया के बदमाश इन तौलकांटों पर कौड़ियों के दाम में अपना गन्ना बेचने के लिए मजबूर करते थे। हजरतपुरिया इस गन्ने को खरीदकर सरकारी रेट के हिसाब से साबितगढ़ शुगरमिल में बेचता था। शुगरमिल का पूरा मैनेजमेंट हजरतपुरिया के इशारों पर नाचता था। इतना ही नही.. शुगरमिल के मैनेजमेंट ने हजरतपुरिया की ताकत के सामने घुटने टेककर उसे करोड़ो रूपये की मैली खरीद का ठेका भी दे दिया था।
लेकिन इस सीजन में नये केन मैनेजर लोकेन्द्र ने मुकेश हजरतपुरिया की बात नही मानी और उसे अपनी जान देनी पड़ी। इलाके के गन्ना और शुगरमिल पर कब्जे के लिए हजरतपुरिया का पिता और उसका गैंग काम कर रहा था। पुलिस ने इस गैंग के 15 बदमाशों को अब तक चिह्नित कर लिया है। पुलिस ने जो 5 बदमाश गिरफ्तार किये है उनमें से हजरतपुरिया का पिता यशपाल जिलाबदर है और बाकी चार 5 से 12 हजार तक के इनामी शूटर्स है। पुलिस की गिरफ्त से फरार सरगना मुकेश 20 हजार की इनामी है। उसका इनाम पचास हजार किये जाने की सिफारिश शासन से की गयी है।
गन्ना की माफियागीरी से करोड़ो कमा रहा था मुकेश-
मुकेश अपनी मनमर्जी से गाँवों में कांटे लगाता था और किसानों का गन्ना खरीदता था। एक कुंटल गन्ने पर उसे 40 से 100 रूपये तक का मुनाफा होता था और सरकारी मूल्य पर शुगरमिल उससे गन्ना खरीद लेती थी। उसने पिछले सीजन में शुगरमिल की मैली का ठेका ले लिया था जिसमें उसने करोड़ो रूपये कमाये। इस सीजन में वह मैली के साथ बगाश का ठेका भी लेना चाहता था।
लोकेन्द्र का साथी था हत्या का चश्मदीद-
लोकेन्द्र का जूनियर अमित सिरोहा वारदात के दिन उसे पापड़ी गाँव लेकर गया, जहाँ उसकी मुलाकात मुकेश से हुई। लोकेन्द्र ने जब मुकेश  की मनमर्जी से कांटे लगाने का विरोध किया तो मुकेश उसे एक बाइक पर बिठाकर नहर के किनारे कई किमी दूर ले गया और गोलियां मारकर उसकी हत्या कर दी। अमित वारदात के बाद कई घंटों तक पुलिस से बचता रहा। पुलिस ने इसे भी लोकेन्द्र की हत्या का गुनाहगार माना है।
पुलिस का हत्यारा रहा है मुकेश-
वेस्ट यूपी के कुख्यात जतन सिरोही का राइटहैंड रहा मुकेश जतन के जेल में रहने के दौरान उसका सबसे खास शूटर रहा है। मुकेश ने उस दौरान तीन बंदीरक्षकों की सरेआम हत्या की थी। इसके अलावा जतन के लिए रोड़ा बन रहे कई गवाहों को भी मुकेश ने मार डाला। मुकेश उम्रकैद की सजायाफ्ता है और डेढ़ साल पहले जमानत पर छूटने के बाद उसने अपने चचेरे भाई अशोक की हत्या की थी।
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