13 साल से तप कर रहे साधु को है शिवजी के दर्शन का इंतजार

बुलंदशहर। अनूपशहर गंगा नदी को छोटी काशी भी कहा जाता है। उसी अनूपशहर में गंगा नदी के किनारे एक साधुबाबा 13 बरसों से खुले आसमान के नीचे खड़े है। शिवजी के साधक साधुबाबा को 13 साल पहले शिवजी ने स्वप्न में इस तपस्या के लिए प्रेरणा दी थी। बाबा को अब फिर से शिवजी के दर्शन का इंतजार है। साधुबाबा ने अपनी इस तपस्या को गंगा की निर्मलता और मानव कल्याण को समर्पित किया है।

बुलंदशहर से 55 किली मीटर दूर गंगा नदी के किनारे बसे अनूपशहर को छोटी काशी कहते है…छोटी काशी में 13 साल से एक साधुबाबा बड़ी साधना में लीन है। गंगा किनारे स्थित एक मंदिर के प्रांगण में खुले आसमान के नीचे बाबा रामचन्द्र गिरी ने अपनी तपस्या की धूनी रमा रखी है।

बाबा का प्रण है कि जब तक भगवान शिव के दर्शन नही हो जाते…उनकी तपस्या यूँ ही जारी रहेगी। बाबा रामचन्द्र गिरी ने पिछले 13 सालों से आसन गृहण नही किया है। वह सोते…जागते केवल खड़े रहते है।

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तपस्या कर रहे बाबा रामचन्द्र गिरी ने बताया कि हवनकुंड के सामने उनकी धूनी चलती रहती है और वहीं दो खंभों पर उन्होने एक झूला बना रखा है। रात में सोते वक्त वह छाती के बल झूले पर टिक जाते है और पूरी रात इसी अवस्था में बीत जाती है।

अपनी इस अनोखी साधना की शुरूआत के बारे में बाबा बताते है कि 13 बरस पहले भगवान शिव को उन्होने सपने में देखा था और उनके आदेश पर उन्होने संसार से मोह त्याग दिया। शिवजी की आज्ञा से उन्होने सन्यास लिया और हरिद्वार में जूना अखाड़े में जाकर दीक्षा ले ली। बाबा ने वहीं से खुले आसमान के नीचे खड़े रहने की तपस्या शुरू कर दी।

शुरूआती दिनों में कई दिक्कतें आयी…लेकिन बाबा ने अब हरिद्वार की भीड़भाड़ से दूर बुलंदशहर के अनूपशहर में गंगा नदी के किनारे अपनी तपस्या जारी रखी है। बाबा कहते है कि भगवान शिव ने उन्हें 12 बरसों तक इस तपस्या के लिए आज्ञा दी थी…लेकिन अब तक उन्हें स्वप्न में फिर से शिवजी के दर्शन नही हुए है। जब तक शिवजी के दर्शन नही होते ..चाहे जीवन बीत जाये..तपस्या जारी रहेगी।

साधुबाबा का हठयोग उनके शरीर पर भारी पड़ रहा है। पैरों के निचले हिस्सों में खून उतरकर जम चुका है…लेकिन बाबा अपनी तपस्या त्यागने को तैयार नही है। बाबा की ये तपस्या मानव कल्याण और गंगा की पवित्रता को समर्पित है।

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