डीएम का जबरन सेल्फी प्रकरण- शहर ने कहा आपराधिक मानसिकता का करेगे विरोध

बुलंदशहर में दो दिन पहले एक युवक ने डीएम आफिस में घुसकर जिलाधिकारी बी0 चन्द्रकला की फोटो खींचने की कोशिश की। आरोप है कि उसकी हरकत का सुरक्षाकर्मियों ने विरोध किया तो उसने हाथापाई करते हुए हंगामा किया। इस पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार करके शांतिभंग की धाराओं में जेल भेज दिया। इस घटना की मीडिया कवरेज का जिले के समाजसेवी और बुद्धिजीवियों ने विरोध किया है। गुरूवार को जिला कलैक्ट्रेट में आयोजित एक संवाद में समाज के गणमान्य लोगो ने इसकी निंदा की।

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कलैक्ट्रेट सभागार में गुरूवार की सुबह शहर के सामाजिक संगठन, महिला अधिकार कार्यकर्ता, बुद्धिजीवियों और कानूनविद् इकठ्ठा हुए। यहाँ एक संवाद का आयोजन किया गया जिसमें जिले की महिला शिक्षाविदों ने बढ़ चढ़कर शिरकत की। संवाद में डीएम के सेल्फी लेने की निंदा की गयी।

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शिक्षाविद् अनीता त्यागी ने अपने संबोधन में कहा कि यह घटना बेहद शर्मनाक है। हमारे शहर में जिलाधिकारी के साथ हुए इस घटना की जितनी निंदा की जाये कम है। इतना ही नहीं, ऐसी कुंठित मानसिकता को बढ़ावा देने वाले लोग भले ही मीडिया के हो, लेकिन उनका भी विरोध किया जाना चाहिए।

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जिला बार एसोसिएशन के सचिव सुमन राघव ने कहा कि किसी की इजाजत के बगैर सेल्फी लेना आपराधिक कृत्य है और आईपीसी की धाराओं में इसकी सजा का उल्लेख भी है। फिर आखिर कोई कैसे इस कृत्य को सही ठहराने की कोशिश कर सकता है। महिलाओं की अस्मिता की रक्षा के लिए बार एसोसिएसन का समर्थन जिलाधिकारी के साथ है।

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वरिष्ठ कानूनविद् इन्द्रा गोयल ने कहा कि बेटियां हम सबके घर में है। उनकी अस्मिता की जिम्मेवारी पूरे समाज की है। और जब कोई कृत्य कानूनन अपराध है तो भला कैसे उसे सही कहा जा सकता है। ऐसी मानसिकता को बढ़ावा देने से पूरा समाज प्रदूषित हो जायेगा। महिलाओं की अस्मिता की रक्षा के लिए हम सब आगे आयेगे और इस कृत्य का विरोध करेगे।

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शिक्षाविद् छवि गर्ग ने कहा कि कहाँ तो हमारे समाज के लोग नौकरशाही को पारदर्शी बनाने की मांग करते है, लेकिन जब इस दिशा में प्रयासरत अफसरों के साथ ऐसी घटनाऐं होगी तो हमारा समाज दिशा भटक जायेगा। महिलाओं की सुरक्षा के साथ किसी तरह का समझौता स्वीकार्य नही है।

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गौरीशंकर डिग्री कालेज की प्राचार्या अंशू गर्ग ने कहा कि किसी की मर्जी के बगैर फोटो खींचना अपराध है। तो फिर कैसे कोई माध्यम किसी की निजता का हनन करने वाले के पक्ष में खड़ा हो सकता है।

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पत्रकार डब्बू मित्तल ने कहा कि ये शर्मनाक है कि डीएम के खिलाफ हुए कृत्य का कोई समर्थन करे। ये निजता का हनन है। पूरा पत्रकार समाज और रोटरी क्लब डीएम के साथ है।

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पत्रकार नदीम खान ने भी इस शर्मनाक घटना का विरोध किया है। उन्होने कहा कि पूरी पत्रकार बिरादरी इस सोच के खिलाफ है। हम समाज में सकारात्मकता के साथ काम करते है। डीएम को हमारा समर्थन है।

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डीएम के आफिस में क्या हुई थी घटना-
एक फरवरी की शाम बुलंदशहर की जिलाधिकारी बी0 चन्द्रकला अपने आफिस में गोद लिये गाँव कमालपुर के बारे में ग्रामप्रधान और अफसरों के साथ वहाँ के कुपोषण, शौचालय निर्माण और सड़कों के बारे में बैठक कर रही थी। एक युवक खुद को ग्रामीण बताते हुए बैठक में पहुँच गया और उसने वहाँ बैठकर बार्ता कर रही जिलाधिकारी के फोटो खींचने शुरू कर दिये। डीएम ने उसे फोटो खींचने से मना किया तो वह नही माना और फिर सुरक्षाकर्मियों के कहने पर उसे बैठक से बाहर निकाल दिया गया। आरोप है कि सुरक्षाकर्मियों ने उससे जब डीएम के फोटो डिलीट करने को कहा तो उसने सुरक्षाकर्मियों से हाथापाई शुरू कर दी और हंगामा करने लगा। पुलिस के सुरक्षाकर्मियों ने उसे पकड़कर थाने भेज दिया जहाँ से उसे शांतिभंग की धाराओं में जेल भेज दिया गया।

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