हाईवे गैंगरेप मामला- ‘जेम्सबांड’ कांस्टेबल लील गया एक IPS समेत 17 पुलिसवालों की नौकरी

बुलंदशहर। हाईवे गैंगरेप केस में अब तक बीट सिपाही से लेकर जिले के एसएसपी तक को राज्य सरकार ने लापरवाही का दोषी माना और सबको निलंबित कर दिया। सीबीआई की जॉच जारी है और कई और पुलिस अफसरो के गले में कानून का शिकंजा फँसता नजर आ रहा है। लेकिन बहुत कम लोग जानते है कि जिला पुलिस की ऐसी छीछालेदर कराने का जिम्मेवार एक पुलिस कांस्टेबल है जिसकी बताई थ्यौरी जिले के अफसरो को ले डूबी। बताया जाता है कि इस कांस्टेबल ने बाबरिया अपराधियों पर ‘पीएचडी’ कर रखी है।

30 जुलाई की सुबह जब हाईवे गैंगरेप की वारदात पुलिस की जानकारी में आयी तो अफसरो ने इलाके के सक्रिय गैंगो को तलाशना शुरू कर दिया। क्राइम ब्रांच में सुपरकॉप कहे जाने वाले दारोगा ने एसएसपी को इस वारदात को अंजाम देने वाले गैंग की थ्यौरी समझाई और वारदात के लिए घुमंतू जाति के अपराधियों को जिम्मेवार ठहरा दिया। लेकिन ऐसे किसी गैंग का सुराग न तो उस दारोगा के पास था और न ही किसी ऐसे गैंग की सक्रियता इलाके में थी। बाबरिया और घुमंतू जाति के अपराधियो का जेम्सबांड कहे जाने वाले फिरोजाबाद में तैनात एक कांस्टेबिल का मथुरा और अलीगढ़ में सुराग तलाशा गया। बाद में उस कांस्टेबल को तत्काल बुलंदशहर बुलवाया गया।

इस कांस्टेबल ने मौका-ए-वारदात देखने के बाद बुलंदशहर क्राइमब्रांच के दो तीरंदाज दारोगाओ के साथ मिलकर तत्कालीन एसएसपी को ऐसा पाठ पढ़ाया कि उनके समेत सारे अफसर हाईवे गैंगरेप की वारदात का ठींकरा बाबरिया जाति के अपराधियो के सिर फोड़ना शुरू हो गये। पहला दिन तो मीटिंग और थ्यौरी बताने में ही बीत गया। अगले दिन जब मामले के खुलासे को लेकर जिला पुलिस के अफसरों पर शासन का दबाब बना तो बाबरिया अपराधियों की तलाश की जाने लगी।

ककोड़ थाने में वारदात के दो दिन पहले से बैठे दो बाबरिया लड़को को इस मामले में उसी कांस्टेबल की सलाह पर घसीट दिया गया। तत्कालीन एसएसपी और उनके मातहत अफसर इस कांस्टेबल पर इतने लट्टू थे कि उसकी बात पर अमल करने में एक मिनट नही लगाया। जब डीजीपी और गृह सचिव बुलंदशहर पहुँचे को एसएसपी ने उन्हें भी बाबरिया थ्यौरी समझाकर आरोपियो की अरेस्टिंग को अपना गुडवर्क बता दिया। डीजीपी ने प्रेस वार्ता में पुलिस के फर्जीवाड़े को सच्चाई का लबादा पहनाया और आधिकारिक रूप से मामले के खुलासे की पुष्टि कर दी। बात यही नही थमी, डीजीपी ने आरोपियों की शिनाख्त के बाद गिरफ्तारी का दावा भी कर डाला।

प्रेसवार्ता में इस खुलासे पर पत्रकारो के बाजिव सवालो का डीजीपी जबाब नही दे पाये। इसके बाद उन्हें भी आभास हो गया था कि कहीं कुछ गड़बड़ जरूर है। इसीलिए 20 मिनट तक हैलीपेड पर डीजीपी जिले के पुलिस अफसरो की क्लास लेते रहे और लखनऊ पहुँचते-पहुँचते जिले के अधिकारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई कर डाली। बीट सिपाही से लेकर चौकी इंचार्ज और एसएसपी तक.. सब सस्पैंड कर दिये गये। इस तरह की कार्रवाई अगले कई दिनो तक कई और पुलिसकर्मियों पर भी जारी रही।

आखिर कौन है बाबरिया अपराधियो पर ‘पीएचडी’ करने वाला कांस्टेबल-
मूलरूप से इस कांस्टेबल को इटावा जिले का निवासी बताया जाता है। वर्तमान में इसकी पोस्टिंग फिरोजाबाद जिले में है। लेकिन अपनी विशेषज्ञता के चलते इसकी मांग अलीगढ़, मथुरा, बुलंदशहर समेत पश्चिमी उत्तर-प्रदेश के कई जिलो में रहती है और संबधित जिलो के एसएसपी इसे अपने जिले में सम्बद्ध करा लेते है। अक्टूबर 2014 में बुलंदशहर के डिबाई में भट्टा कारोबारी के घर में हुई डकैती के मामले में इस कांस्टेबल को बुलंदशहर बुलाया गया था और इसने जगदीश बाबरिया गैंग की गिरफ्तारी में पुलिस की मदद की थी।

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